कृषकग्राम नर्मदापुरम
कई किसान ऐसे भी है जो किसी कारण से नवंबर दिसंबर में गेहूं की बुवाई नहीं करा पाएं हैं। ऐसे किसान चाहे तो जनवरी में भी गेहूं की बुवाई करके बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। किसान भाई इस बात की चिंता बिल्कुल न करें कि बोनी में देरी हो गई है देश के कई हिस्सों में गन्ना, धान जैसी फसलों की देर से कटाई या मौसम की मार के कारण गेहूं की समय पर बुवाई नहीं हो पाती। ऐसे में जनवरी का महीना गेहूं की खेती के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सही किस्मों का चुनाव करके किसान इस चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं।
किसान भाइयों भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कुछ ऐसी गेंहू की किस्में है जो देर से बुवाई की स्थिति में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम हैं। किसान अगर इन उन्नत किस्मों को अपनाते हैं, तो कम समय और सीमित संसाधनों में भी संतोषजनक परिणाम पा सकते हैं। आइए आपको बताते हैजनवरी में गेहूं की बुवाई के लिए टॉप 5 किस्मों के बारे में, जो देरी से बुवाई करने वाले किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
पीबीडब्ल्यू 550 गेहूं की ऐसी किस्म है, जिसे खासतौर पर गन्ने की कटाई के बाद बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह किस्म देर से बोने पर भी अच्छी उपज देने की क्षमता रखती है। किसान इस किस्म से औसतन 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इसकी खासियत यह है कि यह कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती है, जिससे पानी की कमी वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए यह एक बेहतर विकल्प बन जाती है।
डीबीडब्ल्यू 234 देर से बुवाई के लिए एक भरोसेमंद किस्म मानी जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म कम सिंचाई में भी संतोषजनक परिणाम देती है। यही वजह है कि उत्तर भारत के कई राज्यों में किसान इसे तेजी से अपना रहे हैं। यह किस्म करीब 126 से 134 दिनों में तैयार हो जाती है और अनुकूल परिस्थितियों में 35 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है, जिससे फसल को नुकसान का खतरा कम रहता है।
एचडी 3086 गेहूं की उच्च उत्पादन देने वाली किस्मों में शामिल है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के किसान अगर इस किस्म की बुवाई करते हैं, तो 140 से 145 दिनों के भीतर यह फसल तैयार हो जाती है। अनुकूल परिस्थितियों में इससे उच्च पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इस किस्म की एक बड़ी खासियत इसके दाने की बेहतरीन गुणवत्ता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग बनी रहती है और किसानों को अच्छा भाव मिल सकता है।
एचआई 1634 किस्म मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस किस्म को समय पर या थोड़ी देर से भी बोया जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह गर्मी को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से सहन कर लेती है, जो देर से बुवाई की स्थिति में बहुत जरूरी होता है। इस किस्म से किसान औसतन 51.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है।
जनवरी में गेहूं की बुवाई करते समय किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि बेहतर उपज मिल सके।
देर से बोई गई गेहूं की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के 18–20 दिन के भीतर करना बहुत जरूरी होता है। इससे जड़ें मजबूत बनती हैं और कल्लों (टिलर्स) की संख्या बढ़ती है, जिससे पैदावार पर सकारात्मक असर पड़ता है।
जनवरी बुवाई में नाइट्रोजन की आवश्यकता अधिक होती है। किसान खेत की मिट्टी के अनुसार खाद डालें और यूरिया को 2–3 भागों में दें। साथ ही जिंक और सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करने से फसल की बढ़वार बेहतर होती है।
जनवरी में गेहूं की बुवाई करते समय सही किस्म का चयन सबसे अहम होता है। उपरोक्त किस्में न केवल देर से बुवाई के अनुकूल हैं, बल्कि सीमित पानी और बदलते मौसम में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं। अगर किसान क्षेत्र और जलवायु के अनुसार सही किस्म चुनते हैं और वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं तो देरी से बुवाई के बावजूद अच्छी पैदावार और मुनाफा दोनों प्राप्त कर सकते हैं।
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